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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपने मार्केट से कोई चीज खरीदी और आपने खुद को ठगा-सा महसूस किया? यानी उस चीज को इस्तेमाल करने के बाद आपको लगा कि वे चीज इतनी कारगर नहीं है, जितना उसके पैकेट पर दावा किया गया है। ऐसे में आप दुकानदार को अपनी बात बताएंगे या फिर भारी नुकसान होने की स्थिति में उस कंपनी की शिकायत करेंगे। इसे ही उपभोक्ता जागरुकता कहा जाता है। आप जब भी बाजार से कोई सेवा या चीज खरीदते हैं, आप उपभोक्ता बन जाते हैं। एक उपभोक्ता होने के नाते आपके कुछ अधिकार भी हैं। आज विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस है। इस साल की थीम है ‘The Sustainable Consumer’। आइए, जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें- 

क्यों मनाया जाता है विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 
पहली बार अमेरिका में रल्प नाडेर द्वारा उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत की गई, जिसके फलस्वरूप 15 मार्च 1962 को अमेरिकी कांग्रेस में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा उपभोक्ता संरक्षण पर पेश किए गए विधेयक पर अनुमोदन दिया। इस विधेयक में चार विशेष प्रावधान थे जिसमें – उपभोक्ता सुरक्षा के अधि‍कार, सूचना प्राप्त करने का अधि‍कार, उपभोक्ता को चुनाव करने का अधि‍कार और सुवनाई का अधि‍कार शामिल था। बाद में इसमें 4 और अधि‍कारों को जोड़ा गया।


अमेरिका के बाद भारत में मनाया जाने लगा ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस’
अमेरिका के बाद भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत 1966 में मुंबई से हुई थी। 1974 में पुणे में ग्राहक पंचायत की स्थापना के बाद अनेक राज्यों में उपभोक्ता कल्याण हेतु संस्थाओं का गठन किया गया और यह आंदोलन बढ़ता गया। 9 दिसंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बार देशभर में लागू हुआ। इसके बाद 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

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