जिला उपभोक्ता फोरम ने प्रबन्धक रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड के स्थानीय और मुंबई शाखा के प्रबंधक, सलाहकार को उपभोक्ता सेवा में कमी का दोषी पाया है। शिकायतकर्ता कुमारी रसपाल रानी पुत्री जगत सिंह निवासी सिविल लाइंस रुड़की ने शाखा प्रबंधक रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड न्यू रानीपुर मोड़ हरिद्वार, प्रबन्धक रिलायंस निप्पन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुंबई और स्थानीय कम्पनी सलाहकार दीपक के खिलाफ एक शिकायत दायर की थी। बताया कि उसने अगस्त 2010 में बीमा कंपनी के स्थानीय सलाहकार दीपक के माध्यम से एक पॉलिसी कराई थी, जिसमें वार्षिक किश्त के रूप में दस हजार रुपये जमा करा दिए थे। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि उक्त पॉलिसी न तो ट्रेडिशनल है और न ही यूलिप है। इसके बाद शिकायतकर्ता युवती ने सलाहकार से गलत पॉलिसी करने की शिकायत की थी। तब सलाहकार दीपक ने उसे पांच साल के बाद जमा राशि दस हजार रुपये पर साढ़े तीन प्रतिशत ब्याज की दर से प्राप्त होने का आश्वासन दिया था। शिकायतकर्ता तयवधि के बाद उनके ऑफिस पहुंची, तो मौजूद अधिकारी ने उक्त पॉलिसी बंद होने की बात कही थी। आगे कहा था कि दो वर्ष तक चलने पर शिकायतकर्ता को कुछ पैसे मिल जाते। अब कुछ नहीं हो सकता है। जिसपर शिकायतकर्ता ने भारतीय बीमा विनियामक व विकास प्राधिकरण हैदराबाद व बीमा परिषद नियंत्रण निकाय को एक शिकायती पत्र भेजा था। कम्पनी ने बताया था कि दिसम्बर 2014 में उक्त पॉलिसी बंद हो गई थी। जिसपर बीमा कंपनी ने बैंक के माध्यम से शिकायतकर्ता के खाते में दो हजार दो सौ अठानवे रुपये भेज दिए गए थे। शिकायतकर्ता को उक्त जानकारी मिलने पर आश्चर्य हुआ था। थक हारकर शिकायतकर्ता ने फोरम की शरण ली थी। उक्त शिकायत की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष कंवर सैन, सदस्य अंजना चड्ढा और विपिन कुमार ने बीमा कंपनी के तीनों प्रतिनिधि को उपभोक्ता सेवाओं में कमी का दोषी ठहराते हुए शेष बीमा पॉलिसी राशि सात हजार सात सौ एक रुपये, साढ़े तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर और वाद खर्च के रूप में दो हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।

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